युवा मामले और खेल मंत्रालय के अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय खेल महासंघों की बैठक, बैडमिंटन और शूटिंग के प्रदर्शन पर खास नजर
केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्रालय के अधिकारी आज 13 अक्टूबर को राष्ट्रीय खेल महासंघों के प्रतिनिधियों के साथ आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारतीय दल के प्रदर्शन की समीक्षा करेंगे। भारत ने इन खेलों में 85 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया था, जो पिछले खेलों की तुलना में 21 पदक कम है।
सूत्रों के अनुसार मंत्रालय के अधिकारी कुछ अनुभवी खिलाड़ियों के प्रदर्शन से निराश हैं, जिन पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे लेकिन वे पदक नहीं जीत सके। तीन साल के चक्र में खिलाड़ियों की तैयारी पर 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की बात सामने आई है। ऐसे में पैसे के सदुपयोग पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
टॉप्स योजना की भी होगी समीक्षा
बैठक में सरकार की प्रमुख टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) के तहत धन जारी करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाएगी। जिन खेलों ने सबसे ज्यादा निराश किया है उनमें बैडमिंटन शामिल है, जहां भारत को सिर्फ एक कांस्य पदक मिला। शूटिंग में 15 पदक आए लेकिन उम्मीदें इससे कहीं ज्यादा थीं। एथलेटिक्स का प्रदर्शन भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अनुभवी खिलाड़ियों को काफी सुविधाएं दी गई थीं, लेकिन परिणाम नहीं आए। अब महासंघों से जवाब मांगा जाएगा कि तैयारी में कहां कमी रह गई।
चोटों का मुद्दा भी गरमाया
समीक्षा बैठक में खिलाड़ियों की चोटों का मुद्दा भी उठने की उम्मीद है। सूत्रों का कहना है कि कई खिलाड़ियों ने खेलों में पहुंचने के बाद चोट की जानकारी दी, जबकि उनकी तैयारी पर पहले ही भारी रकम खर्च हो चुकी थी। मंत्रालय का मानना है कि चोट प्रबंधन व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
इस समीक्षा के नतीजे भारतीय खेलों के भविष्य की दिशा तय करेंगे। अगर कमियां दूर की गईं तो अगले ओलंपिक चक्र में बेहतर परिणाम की उम्मीद की जा सकती है। खेल प्रेमी उम्मीद कर रहे हैं कि यह बैठक सिर्फ औपचारिकता न बनकर वास्तविक सुधार का माध्यम बने।
किन खेलों पर रहेगी खास नजर
समीक्षा बैठक में बैडमिंटन, शूटिंग और एथलेटिक्स के प्रदर्शन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बैडमिंटन में सिर्फ एक कांस्य पदक आना बड़ी निराशा थी, क्योंकि इस खेल में भारत से ज्यादा उम्मीदें थीं। शूटिंग में 15 पदक आए, लेकिन टॉप्स योजना के तहत मिले भारी निवेश के मुकाबले यह संख्या कम मानी जा रही है।
एथलेटिक्स में भी कुछ प्रमुख खिलाड़ी पदक से चूक गए। मंत्रालय के अधिकारी जानना चाहते हैं कि तैयारी में कहां कमी रह गई। प्रत्येक खेल महासंघ से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
टॉप्स योजना का ऑडिट
टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के तहत चुनिंदा खिलाड़ियों को विदेशी प्रशिक्षण, उपकरण और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। इस योजना पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। समीक्षा में यह देखा जाएगा कि निवेश का प्रतिफल किस हद तक मिला।
सूत्रों के अनुसार कुछ खिलाड़ियों को लगातार समर्थन मिलने के बावजूद परिणाम नहीं आए। अब योजना के तहत खिलाड़ियों के चयन मानदंडों पर भी पुनर्विचार हो सकता है।
महासंघों की जवाबदेही
राष्ट्रीय खेल महासंघों से पूछा जाएगा कि उन्होंने खिलाड़ियों की तैयारी के लिए क्या कदम उठाए। प्रशिक्षण शिविरों की गुणवत्ता, विदेशी दौरों की उपयोगिता और कोचिंग स्टाफ के प्रदर्शन की समीक्षा होगी।
कई महासंघों में प्रशासनिक विवाद भी प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं। मंत्रालय चाहता है कि खेल प्रशासन पेशेवर तरीके से चले।
आगे की राह
इस समीक्षा के बाद खेल मंत्रालय एक कार्य योजना तैयार करेगा। अगले ओलंपिक चक्र के लिए लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। युवा प्रतिभाओं की पहचान और विकास पर ज्यादा जोर देने की उम्मीद है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ समीक्षा से काम नहीं चलेगा, बल्कि सिफारिशों को लागू करना भी जरूरी है। देखना होगा कि इस बैठक के बाद कितने ठोस कदम उठाए जाते हैं।