NEET UG 2026 विवाद: अब तक क्या हुआ
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) 2026 देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा थी, जो 3 मई 2026 को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में लगभग 23 लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया था, जो MBBS, BDS और अन्य चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के इच्छुक थे। लेकिन परीक्षा के कुछ दिनों बाद पेपर लीक की पुष्टि होने पर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने 12 मई 2026 को पूरी परीक्षा रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला लिया।
परीक्षा रद्द होने से 23 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे। मामले ने इतना तूल पकड़ा कि संसद की स्थायी समिति ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू की।
अब 9 अक्टूबर 2026 को मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट सदन में पेश कर दी है। इस रिपोर्ट में NEET सहित सभी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में आमूलचूल सुधारों की सिफारिश की गई है। समिति ने NTA की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए एजेंसी को संसद के प्रति जवाबदेह बनाने की मांग की है।
समिति की प्रमुख सिफारिशें
1. कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) की ओर बदलाव
समिति ने सिफारिश की है कि NEET UG को पेन-पेपर मोड से हटाकर पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदला जाए। CBT मोड में प्रश्नपत्रों के लीक होने की संभावना काफी कम हो जाती है, क्योंकि प्रत्येक अभ्यर्थी को अलग-अलग प्रश्न सेट मिलते हैं और परीक्षा सुरक्षित सर्वरों पर आयोजित होती है।
2. NTA की संसद के प्रति जवाबदेही
रिपोर्ट में कहा गया है कि NTA को कानून बनाकर संसद के प्रति जवाबदेह बनाया जाए। वर्तमान में एजेंसी की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है। विधायी निगरानी से एजेंसी के फैसलों पर सवाल उठाए जा सकेंगे और जवाबदेही तय होगी।
3. दो चरणों वाली परीक्षा प्रणाली
समिति ने NEET को दो चरणों में आयोजित करने का सुझाव दिया है — पहले चरण में प्रारंभिक छंटनी और दूसरे चरण में अंतिम चयन। इससे एक ही परीक्षा पर पूरे भविष्य का दांव लगाने का दबाव कम होगा और मूल्यांकन भी अधिक न्यायसंगत होगा।
4. आयु और प्रयास सीमा
रिपोर्ट में परीक्षा में बैठने के लिए उचित आयु सीमा और प्रयासों की अधिकतम संख्या तय करने की सिफारिश की गई है। इससे कोचिंग उद्योग पर निर्भरता कम होगी और योग्य अभ्यर्थियों को समय पर अवसर मिलेगा।
5. लगभग 1,000 सुरक्षित CBT केंद्र
समिति ने देशभर में लगभग 1,000 सुरक्षित कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इन केंद्रों में जैमर, सीसीटीवी निगरानी और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी सुविधाएं अनिवार्य होंगी।
6. विशेषज्ञ प्रश्न बैंक
रिपोर्ट में IIT, AIIMS और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद से एक सुरक्षित प्रश्न बैंक तैयार करने की सिफारिश की गई है। इससे प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और गोपनीयता दोनों सुनिश्चित होगी।
23 लाख अभ्यर्थियों पर असर
परीक्षा रद्द होने से प्रभावित लगभग 23 लाख अभ्यर्थी अब नई परीक्षा तिथि का इंतज़ार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समिति की सिफारिशों को लागू करने में समय लगेगा, लेकिन ये सुधार भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में निर्णायक साबित होंगे।
आगे क्या होगा
1. सरकार संसदीय समिति की रिपोर्ट पर विचार करके सुधारों का रोडमैप तैयार करेगी।
2. NTA को CBT बुनियादी ढांचे के विस्तार का निर्देश दिया जा सकता है।
3. रद्द परीक्षा के पुनः आयोजन की तिथि की घोषणा आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर की जाएगी।
4. प्रश्न बैंक और दो चरणों की प्रणाली पर विशेषज्ञ समिति का गठन संभव है।
5. अभ्यर्थियों को सलाह है कि वे पढ़ाई जारी रखें और केवल आधिकारिक घोषणाओं पर भरोसा करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
NEET UG 2026 की परीक्षा कब रद्द हुई?
3 मई 2026 को आयोजित परीक्षा पेपर लीक की पुष्टि के बाद 12 मई 2026 को रद्द कर दी गई थी।
संसदीय समिति की रिपोर्ट कब पेश हुई?
मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट 9 अक्टूबर 2026 को सदन में पेश की।
समिति की सबसे बड़ी सिफारिश क्या है?
CBT में बदलाव, दो चरणों की परीक्षा और NTA को कानून बनाकर संसद के प्रति जवाबदेह बनाना प्रमुख सिफारिशें हैं।
कितने अभ्यर्थी प्रभावित हुए?
परीक्षा रद्द होने से लगभग 23 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं, जो अब पुनः परीक्षा का इंतज़ार कर रहे हैं।
पुनः परीक्षा की तिथि कब घोषित होगी?
पुनः परीक्षा की तिथि की आधिकारिक घोषणा neet.nta.nic.in पर की जाएगी। अभ्यर्थी अफवाहों से बचें।
निष्कर्ष
NEET UG 2026 का पेपर लीक कांड भारतीय परीक्षा प्रणाली के लिए एक कड़वी सीख है, लेकिन संसदीय समिति की सिफारिशें सुधार की ठोस दिशा दिखाती हैं। CBT में बदलाव, दो चरणों की परीक्षा, सुरक्षित केंद्रों का नेटवर्क और NTA की जवाबदेही — यदि ये सुधार ईमानदारी से लागू हुए तो 23 लाख छात्रों का भरोसा फिर से बहाल हो सकता है। प्रभावित अभ्यर्थी धैर्य रखें, तैयारी जारी रखें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान दें।